रविवार, 19 सितंबर 2010

दूरियाँ


पिघलती बर्फ पर चलना
जितना मुशकिल है,
उससे अधिक मुशकिल है
तुम्हारी आँखों को पढ़ना।

सारे शब्द
जंगल के वृक्षों पर
मृत सर्पों की तरह लटके हैं
क्योंकि ये तुम तक किसी तरह
पहुँच नहीं सकते
और जो मुझ तक 
पहुँचते हैं
वे सिर्फ दस्तक देते हैं
द्वार खुलने की प्रतीक्षा नहीं करते।

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